
बंद डिब्बे खोल
ये
हो
सकता
है
,
ये
संभव
है ;
लेकिन
ऐसे
ही
विचारों
से
सजी
है
हमारी दुनिया
और
हम
यूँ
ही
गुजार
देते
है ;
और
सोचने
का
परिणाम
काम
के
रूप में
परिणत
होते
-
होते
थम
जाता
है और
हम
चूँक जाते
है
दुनिया
को
एक
शानदार
उदाहरण
देने
में
|
यह
कहानी
जिसका
title
भी
है
“
बंद
डिब्बे
खोल
”
--
न
सिर्फ
कोई
एक
कहा
है
बल्कि
यह
एक
किसी
महान
यात्रा
के
शब्दों
की
वाणी
है|
यह
कहानी
विश्व
की
प्राचीनतम
नगरी
वाराणसी
में
शुरू
होती
है
और
, पूरा
रंगमंच
सजता है दक्षिण
भारत
के
हुबली
नगर
में
|
ऐसी
बात
नहीं है कि
यह
सिर्फ
दो
नगरों
के
बीच
की
ही
कहानी है
, बल्कि
यह
तो
दक्षिण
भारत
के
प्रति
यूपी
,
बिहार
के
युवाओं
में
व्याप्त
भ्रम
को
तोङ
देने
वाली
कहानी
है|
यह
मजबूत
भारत
के
सपनों
को हाशिए
से
हरियाली
की
ओर
लाने की
कहानी
है
;
यह
कहानी है
कुछ
ऐसे
युवाओं
की
जिन्होंने
अपने
कार्यों
से
समाज
में
बदलाव
लाकर एक उदाहरण
पेश
किया
है
|
कुछ
ऐसी
और
बातें
जो होती
तो
हर
जगह
हैं
पर
ऐसी
स्वतंत्रता
सब जगह
नहीं
मिलती
|
जी
हाँ
,
कम्पनियो
के
उच्च पदासीन
लोगों
का
एक
मंच
पर
आकर
युवाओं
के लिये
प्रेरित
मार्गदर्शक
का
कार्य
करना
,
वास्तव में
स्वयं
में
अनूठा हैं
और
एक
चीज
जिसने
इतनी चकाचौध
दुनिया
में
भी
सोचने
को
मजबूर
कर दिया
,
पग
-
पग
पर
जिसने
टोका
को
रखने
वाले
सम्मानीय
श्री देशपांडे sir ,
जयश्री
mam
,
नवीन
झा
sir
दिलीप
मोदी sir
की
साधारण
जीवनशैली
असाधारण
प्रतिभाओ
के
साथ
|
इस
रंगमंच
को
साकार
रुप
देने
वाले
वे
सभी
संगठन
कर्मी
,
सदस्य
,
,
भोज्य
तैयार
,
सफाईकर्मी
पदार्थ
करने
वाले
कर्मी
और
वे
सभी
जिनका
इस
कहानी
में जुड़ाव
था
,
इस
कहानी
के
भाग
है
|
इस
कहानी
का
मंचन
2016
ईस्वी
माह
से
ही
लिखा
जा
रहा
था
,
परंतु
तात्कालिक
परिस्थितियों
पर
गौर
करे
तो december
माह
में
अजय
सुमन
सर
के साथ हुई
वैचारिक
संवाद
से
ये
कहानी
वहा से
है,
जहा
से
ignore
कर
देते
है
|
आइये
अब
शुरू
करते
है
,
इस
यात्रा
की
कहानी
को
,
जिसको
हम
पात्रों
के
माध्यम
से
समझने
का
प्रयास
करेंगे
साथ
ही
कुछ
चित्रों
के
माध्यम
से
इस
कहानी
को
शुरुआत
करने
का
कार्य
किया
अजय
सुमन
सर ने
जैसा
कि
जा
चुका
है
|
हमेशा
चेहरे
पर
मुस्कान
लिए
गर्मजोशी
के
साथ
बात
करने
का
तरीका
And
busy schedule में
भी
energetic बने
कहा
,
जो
वर्षों
के
अपने काम
के
दौरान
जब
-
जब
इनसे
पूछे
कि
कोई परेशानी
तो
जबाव
मिला-‘ No ’|”
वास्तव
में कभी
चेहरे
पर
कोई
शिकन
दिखाई
ही
नहीं
देता|
इनके
बारे
में
एक
important
fact यह
है कि
दूसरों
को
आगे
रखना
and
light में
खुद को पीछे
रख
अपने
कार्यों
से
खुद
को
आगे
करना
|
अब
अगला
पात्र
है
जो
social
media
कीresponsibility
को
देखने
का
कार्य
करते
है ,तकनीक
के
इस
युग
में
हम
आसानी
से
photo
, information एक
मंच
पर
समय
रहते
पा
लेते
है तो
वह संभव
है
अमरजीत
भैया से
|
Meeting
हो
या
रेल-
यात्रा
,
कार्यक्रम
हो
या
मौज
-
मस्ती
;
इसकी
glimpse
, इसकी
यादों
को
सहेजने
का
कार्य
करते
है
| इसलिये
इन्हे
“A Recorder Of Glimpse” भी
कहते
है
|
जारी है .........
जारी है .........



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