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हम सभी मां गंगा की पावन धरा,काशी विश्वनाथ के महानगरी में महामना जी के  तप व संकल्प से रचित सर्व विद्या की राजधानी काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र हैं | मानव जीवन स्वयं में ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक महान उपहार माना जाता है , फिर भी मानव प्राणी को प्रेरणा की जरूरत होती है | हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमें महामना जी के बगिया में इतने प्रेम व अपनत्व के साथ पढ़ने का मौका मिला | जहां तक प्रेरणा की बात है तो यह विश्व विद्यालय के नींव के समय के इतिहास में ही छिपा है | इस विश्वविद्यालय के निर्माण के स्वप्नद्रष्टा व संस्थापक महामना जी के पास किसी भी प्रकार का आर्थिक संसाधन नहीं था , फिर भी इतना सुंदर विश्वविद्यालय इस धरा पर निर्मित हो गया और आज भी दिन प्रतिदिन यह विश्वविद्यालय अपनी उसी विचारधारा को लेकर कायम है जो महामना ने दिया था -                                        "  न त्वहं कामये राज्यं न स...